- बसंत पंचमी पर वासंती रंग में रंगेगा महाकाल मंदिर, भस्म आरती से होगी शुरुआत; सांदीपनि आश्रम में भी होंगे विशेष धार्मिक आयोजन!
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद ली गई आज्ञा, पंचामृत अभिषेक और भस्म अर्पण के साथ साकार रूप में भगवान ने दिए दर्शन
- महाकाल दरबार पहुंचे सुनील शेट्टी, परिवार के साथ शांत माहौल में किए दर्शन; Border-2 की सफलता के लिए मांगा आशीर्वाद
- सभा मंडप से गर्भगृह तक अनुष्ठानों की श्रृंखला, भस्म अर्पण के बाद साकार रूप में हुए महाकाल के दर्शन; जल और पंचामृत से अभिषेक, रजत मुकुट और शेषनाग श्रृंगार के साथ खुले मंदिर के पट
- महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए अभिनेता मेका श्रीकांत, नंदी हॉल में बैठकर किया जाप
उज्जैन में दो दिवसीय भुजरिया मेले की शुरुआत, देशभर से पहुंचे अखाड़े और संतगण; आज महाकाल और गोगादेवजी का होगा भव्य मिलन!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में भक्ति और आस्था का अनुपम संगम एक बार फिर देखने को मिल रहा है। रविवार से आरंभ हुआ 28वां भुजरिया पर्व श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उत्सव का अद्वितीय अवसर लेकर आया है। भगवान जाहरवीर गोगादेवजी की छड़ियों (निशान) का दो दिवसीय मेला शनिवार को ही प्रारंभ हो चुका है और देश के विभिन्न कोनों—मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों से गोगादेवजी के अनुयायी, संतगण, अखाड़े और गायन दल उज्जैन पहुंच चुके हैं।
रविवार को इस महापर्व का मुख्य आकर्षण होगा श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में भगवान महाकाल और गोगादेवजी का पावन मिलन। शाम के समय देशभर से आई छड़ियां मंदिर परिसर में एकत्रित होंगी, जहां राज्यसभा सांसद एवं श्री क्षेत्र वाल्मीकि धाम पीठाधीश्वर, राष्ट्रीय संत बालयोगी उमेशनाथ महाराज द्वारा विधिवत पूजन कर इस दिव्य मिलन का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और विभिन्न धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे, जो इस आयोजन को और गरिमामय बनाएंगे।
पूजन-अर्चन के पश्चात गोगादेवजी की निशान शोभायात्रा की शुरुआत महाकालेश्वर मंदिर से होगी। यह यात्रा पटनी बाजार, गोपाल मंदिर ढाबा रोड, दानी गेट, अनंत पेठ, जूना सोगारिया, गोंसा दरवाजा, वाल्मीकि चौराहा और बड़नगर रिंग रोड से होती हुई श्री क्षेत्र वाल्मीकि धाम पहुंचेगी। मार्ग में धार्मिक, सामाजिक, खेल और राजनीतिक संस्थाओं द्वारा छड़ियों का स्वागत, पूजन और उस्ताद एवं खलिफाओं का सम्मान किया जाएगा।
वाल्मीकि धाम में पहुंचने के साथ ही यह शोभायात्रा एक विशाल मेले का रूप ले लेगी, जहां रात्रि में गोगा गायन का भव्य आयोजन होगा। लोकधुनों, भजन-कीर्तन और गोगादेवजी के गौरवगान से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठेगा।